Chhattisgarh: Forest produce will change the fate of women, NITI Aayog has seen Chhattisgarh’s model.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज के जरिए आदिवासी परिवारों की कमाई बढ़ाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को नीति आयोग ने सराहा है। आयोग ने राज्य के वन धन विकास केन्द्रों के मॉडल को दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी बताया है।
नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) के दल ने 8 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ का दौरा कर वन धन विकास केन्द्रों की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। दल ने खास तौर पर महिला स्व-सहायता समूहों को वनोपज के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, उत्पाद तैयार करने और बाजार में बेचने तक जोड़ने के प्रयासों को देखा।
नीति आयोग की महानिदेशक निधि छिब्बर के नेतृत्व में आए दल को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक संजीता गुप्ता ने राज्य में चल रही आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और पीएम-जनमन के तहत वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से महिला समूहों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
निधि छिब्बर ने कहा कि महिला समूहों को काम के अलग-अलग चरणों में लगातार सहयोग मिलने से उनकी आजीविका के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े समूहों को भी इन केन्द्रों से जोड़ा जाए और केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए उन्हें वित्तीय सहायता दिलाने की दिशा में काम किया जाए।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य में वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब इस मॉडल को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
