Chhattisgarh | At the age of 57, the High Court took a major decision on IVF.
बिलासपुर। 22 साल से संतान की उम्मीद लगाए बैठे छत्तीसगढ़ के एक दंपती के लिए हाई कोर्ट का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। 57 साल के पति की उम्र कानून में तय सीमा से अधिक होने के कारण दंपती को IVF की अनुमति नहीं मिल रही थी। अब हाई कोर्ट ने इस आधार पर इलाज रोकने वाले आदेश को रद्द कर दिया है।
22 साल से संतान का इंतजार
मामला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के दंपती का है। पत्नी की उम्र करीब 47 साल और पति की 57 साल है। शादी को करीब 22 साल हो चुके हैं। दंपती ने पहले भी संतान के लिए इलाज कराया था। 2015 में पत्नी गर्भवती हुई थीं, लेकिन करीब चार महीने बाद गर्भपात हो गया।
इसके बाद दंपती ने IVF के जरिए संतान प्राप्ति की उम्मीद की। चिकित्सकीय जांच और काउंसलिंग के बाद उन्हें इलाज के लिए उपयुक्त पाया गया।
पति की उम्र बनी अड़चन
Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 में महिला के लिए 50 वर्ष से कम और पुरुष के लिए 55 वर्ष से कम आयु की सीमा निर्धारित है। पति की उम्र 57 साल होने के कारण अनुमति रोक दी गई थी। दंपती ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि सिर्फ पति की उम्र अधिक होने के आधार पर पत्नी को IVF से वंचित नहीं किया जा सकता, जबकि वह खुद निर्धारित आयु सीमा और चिकित्सकीय मानकों के भीतर है।
कोर्ट ने संबंधित आदेश रद्द करते हुए दंपती को IVF/ART उपचार आगे बढ़ाने की अनुमति दी। हालांकि इलाज सभी जरूरी चिकित्सकीय, कानूनी और नियामकीय शर्तों के अधीन रहेगा।
