Chhattisgarh | Sowing in the fields is complete, now keep an eye on this
रायपुर। 6 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की बोनी अब लगभग पूरी हो गई है। 6 अक्टूबर तक प्रदेश में 48.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है, जो सरकार के तय लक्ष्य का करीब शत-प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में कुल 48.69 लाख हेक्टेयर में बोनी का लक्ष्य रखा गया था।
खाद-बीज का भी पूरा इंतजाम
कृषि विभाग के मुताबिक, किसानों को अब तक 13.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं।
खरीफ सीजन के लिए राज्य में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले सहकारी और निजी क्षेत्रों में 18.02 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। यानी निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा खाद पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।
इसी तरह प्रमाणित बीज के लिए 4.95 लाख क्विंटल का लक्ष्य है। इसके मुकाबले 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया और अब तक 4.62 लाख क्विंटल किसानों को दिया जा चुका है।
धान से लेकर दलहन तक बोनी
प्रदेश में अब तक धान के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलों की बोनी की गई है। सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद और प्रमाणित बीज आसानी से मिलें, इसके लिए सोसायटियों में उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को खाद-बीज वितरण में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभागीय अधिकारी भी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।
बारिश ने भी दिया साथ
6 अक्टूबर की सुबह तक प्रदेश में 1155.2 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश की औसत वार्षिक बारिश 1246.3 मिलीमीटर है। वहीं पिछले 10 वर्षों में इसी अवधि की औसत बारिश 1139.9 मिलीमीटर रही है। यानी इस साल अब तक की बारिश सामान्य औसत से 15.3 मिलीमीटर ज्यादा है।
किसानों को 8,178 करोड़ का कृषि ऋण
किसानों को खेती के लिए आर्थिक मदद देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए अल्पकालीन कृषि ऋण भी दिया जा रहा है। 5 अक्टूबर तक किसानों को 8,178.54 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है।
पिछले साल इसी अवधि में 6,938.10 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था। इस खरीफ सीजन में किसानों को कुल 8,800 करोड़ रुपये का कृषि ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है।
यानी बोनी का लक्ष्य लगभग पूरा होने के बाद अब सरकार की नजर फसल की आगे की स्थिति, खाद-बीज की उपलब्धता और किसानों को समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद पर है।
