Chhattisgarh | बस्तर में पहली बार बड़ा सहकारिता सम्मेलन, क्या बदलेगा?

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Chhattisgarh | For the first time, a major cooperative conference is being held in Bastar, what will change?

रायपुर, 6 अक्टूबर। बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन होने जा रहा है। 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी जुटेंगे। सम्मेलन में ‘सहकार से समृद्धि’ की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी और अगले तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी करेंगे। अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल और अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी इसमें शामिल होंगे।

सम्मेलन में करीब 15 राज्यों के सहकारिता सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक हिस्सा लेंगे। चर्चा का मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने पर रहेगा।

बैठक में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों यानी एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, एम-पैक्स के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल सेवाओं, भंडारण क्षमता और सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने पर मंथन होगा। इसके साथ ही एम-पैक्स के जरिए उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से बेहतर समन्वय पर भी चर्चा होगी।

पहले दिन राज्यों की ओर से एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता बढ़ाने, डिजिटल सेवाओं और किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के अनुभव साझा किए जाएंगे। विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना और प्राथमिक समितियों को निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।

दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अगले पांच साल के वित्तीय सहयोग और राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा रखेंगे। इसके अलावा बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी कराया जाएगा।

छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां भी होंगी चर्चा में

सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना के अनुसार, ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत राज्य में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां बनाई गई हैं।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए किसानों के खाते खोले गए हैं। वहीं 2,058 एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। इनमें उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हो चुका है।

भंडारण के मोर्चे पर भी काम जारी है। 725 एम-पैक्स में गोदाम बनाए गए हैं, जबकि नए और गोदाम विहीन एम-पैक्स में भी निर्माण की योजना है। विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चुने गए हैं।

कोंडागांव और भोरमदेव के एथेनॉल संयंत्रों को भी सहकारी मॉडल के उदाहरण के तौर पर रखा जाएगा। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की प्रक्रिया चल रही है।

अब नजर इस बात पर होगी कि जगदलपुर में होने वाले इस सम्मेलन से बस्तर और छत्तीसगढ़ के सहकारी मॉडल को देश के दूसरे राज्यों तक कैसे पहुंचाया जाता है।

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