केशकाल:- केशकाल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत गारका में एनएच-30 किनारे संचालित “मामा ढाबा” को लेकर रविवार को बड़ा विवाद सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर ढाबे को तोड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि ढाबे में शराब परोसने और अनैतिक गतिविधियां संचालित होने जैसी शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा था। वहीं ढाबा संचालक ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम बताया है।
गांव के सरपंच मुकेश मंडावी और उपसरपंच शीला निषाद ने बताया कि उक्त ढाबा अवैध अतिक्रमण कर बनाया गया था और यहां संचालित गतिविधियों का गांव के बच्चों, युवाओं तथा स्कूली छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। इस संबंध में कई बार ढाबा संचालक को चेतावनी दी गई, ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित कर प्रशासन और पुलिस को भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए स्वयं ढाबा हटाने की कार्रवाई की। ग्रामीणों ने कहा कि हमें ग्राम गारका में इस तरह का कोई ढाबा नहीं चाहिए, इसलिए आज गांव के लोग मिलकर इसे हटाने आए हैं।
मामा ढाबा के संचालक संजय सिन्हा ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके ढाबे में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि संचालित नहीं होती और कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश के चलते उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। संजय सिन्हा का आरोप है कि ग्राम पंचायत और सरपंच उनसे निजी दुश्मनी निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के उनके ढाबे को नुकसान पहुंचाया गया है, जिसे लेकर वे माननीय हाईकोर्ट की शरण लेंगे तथा ढाबा तोड़ने में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। एक ओर ग्रामीण गांव के सामाजिक माहौल और युवाओं के भविष्य को देखते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, तो दूसरी ओर ढाबा संचालक इसे कानून हाथ में लेने की घटना बता रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।
