Chhattisgarh | Sirpur’s identity will resonate in the world!
रायपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी सिरपुर ने वैश्विक पहचान की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर बसे सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे इस प्राचीन सांस्कृतिक केंद्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने और पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है।
डेढ़ हजार साल पुरानी विरासत
प्राचीन समय में श्रीपुर के नाम से पहचाना जाने वाला सिरपुर दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है। यहां का लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार, गंधेश्वर महादेव मंदिर और सुरंग टीला इसकी ऐतिहासिक पहचान हैं। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी।
सिरपुर की खासियत यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का ऐतिहासिक सहअस्तित्व है। पुरातात्विक उत्खनन में यहां दो हजार से अधिक पुरावशेष मिलने का उल्लेख है, जो इसकी समृद्ध कला, स्थापत्य और प्राचीन जीवन की कहानी बताते हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है गति
राज्य सरकार के मुताबिक, सिरपुर को वैश्विक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जनवरी 2026 में सिरपुर के ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया था और इसके संरक्षण तथा यूनेस्को सूची में शामिल कराने के प्रयासों पर जोर दिया था।
हालांकि, अस्थायी सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है। इसके लिए आगे विस्तृत नामांकन, संरक्षण प्रबंधन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सिरपुर को भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो इससे इतिहासकारों, पर्यटकों और शोधकर्ताओं का आकर्षण बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी फायदा मिल सकता है।
