नीरज उपाध्याय | केशकाल
केशकाल नगर पंचायत केशकाल की कार्यशैली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। पुराने बस स्टैंड के बीचों-बीच लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए अटल परिसर की वर्तमान स्थिति नगर पंचायत की लापरवाही, उदासीनता और बदइंतजामी की पोल खोल रही है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में निर्मित यह परिसर आज बदहाली, गंदगी और अव्यवस्था का शिकार होकर अपनी दुर्दशा बयां कर रहा है। जिस स्थान को नगर की पहचान के लिए विकसित किया गया था, वही आज कचरे, धूल और उगी हुई झाड़ियों से पट चुका है। यह केवल एक परिसर की बदहाली नहीं, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न के सम्मान की अनदेखी भी है।
परिसर में उगने लगे हैं खरपतवार-
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा इस निर्माण कार्य पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन रखरखाव के अभाव में पूरा परिसर धीरे-धीरे बदहाल होता जा रहा है। परिसर में फैली गंदगी और चारों ओर उगे खरपतवार साफ दर्शाते हैं कि लंबे समय से यहां नियमित साफ-सफाई तक नहीं कराई गई है। नगर पंचायत केवल निर्माण कार्यों के उद्घाटन और प्रचार तक सीमित रह गई है, जबकि उनके रखरखाव और जनसुविधाओं की ओर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
प्रधानमंत्री के सम्मान के साथ समझौता क्यों-
बता दें कि यह अटल परिसर शहर के बीचों-बीच स्थित है, ऐसे में प्रतिदिन हजारों लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हुए इस बदहाल परिसर को देख रहे हैं। इससे न केवल स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि केशकाल नगर पंचायत की छवि भी लगातार धूमिल हो रही है। हैरानी की बात यह भी है कि अटल परिसर को बने अभी कुछ ही महीने हुए हैं और इतनी कम अवधि में ही इसकी स्थिति बदहाल नजर आने लगी है। ऐसे में आने वाले समय में इस परिसर की हालत क्या होगी, इसे लेकर भी लोगों में चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।
सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के, फिर भी ये स्थिति-
सबसे अहम बात यह है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में “डबल इंजन” की सरकार है। नगर पंचायत अध्यक्ष भाजपा के हैं, क्षेत्रीय विधायक भाजपा के हैं, सांसद भाजपा के हैं, मुख्यमंत्री भाजपा के हैं और देश के प्रधानमंत्री भी भाजपा के हैं। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के ही पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा और उनके नाम पर बने परिसर की ऐसी बदहाल स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या इस लापरवाही की जवाबदेही तय होगी-
अब शासन-प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि सार्वजनिक धन से बनाए गए इस परिसर की गरिमा और सम्मान बरकरार रह सके।
