Chhattisgarh: The first gender-balanced counselling in the country, hearings for men, women and the elderly
दुर्ग। छत्तीसगढ़ का दुर्ग अब पूरे देश के लिए मिसाल बन रहा है। यहां शुरू हुआ जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग सिस्टम परिवारों को टूटने से बचाने में गेमचेंजर साबित हो रहा है।
पहले जहां महिला थाना का परामर्श केंद्र सिर्फ महिलाओं की शिकायतों तक सीमित था, अब वहां पुरुषों और बुजुर्गों की समस्याएं भी बराबरी से सुनी जा रही हैं। यानी अब हर पक्ष को बोलने और सुने जाने का पूरा मौका मिल रहा है।
सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब यहां पुरुष काउंसलर भी तैनात हैं। वजह साफ है अब पुरुष भी मानसिक और पारिवारिक तनाव के मामले लेकर सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया जाता था।
दुर्ग में ‘सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच’ भी बनाई गई है, जहां बुजुर्गों की समस्याओं पर खास फोकस किया जा रहा है। यहां आने वाले मामलों में बेटे-बहू द्वारा प्रताड़ना, संपत्ति विवाद और घर से निकालने जैसी गंभीर शिकायतें शामिल हैं।
अब तक करीब 200 केस सामने आए हैं, जिनमें से 130 का समाधान हो चुका है। ये दिखाता है कि सही समय पर बातचीत और काउंसलिंग कितनी असरदार हो सकती है।
सरकार और प्रशासन का मानना है कि यह मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है, क्योंकि यह सिर्फ विवाद सुलझा नहीं रहा, बल्कि परिवारों को टूटने से भी बचा रहा है।
