Chhattisgarh | न्यायिक सेवा में नया नियम, मेरिट टाइट

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Chhattisgarh | New rule in judicial service, merit tight

रायपुर, 29 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ में न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स में संशोधन करते हुए नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। यह बदलाव हाईकोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू किए गए हैं।

नए नियमों के तहत अब सिविल जज (जूनियर और सीनियर श्रेणी) को पदोन्नति के लिए कम से कम 7 साल की सेवा अनिवार्य कर दी गई है। वहीं, किसी पद पर बने रहने की न्यूनतम अवधि को 5 साल से घटाकर 3 साल कर दिया गया है, ताकि योग्य अधिकारियों को समय पर आगे बढ़ने का मौका मिल सके।

हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती कोटे को भी पूरी तरह से रिवाइज किया गया है। पहले जहां अलग-अलग श्रेणियों के लिए 65% और 10% का प्रावधान था, अब इसे बदलकर 50% और 25% कर दिया गया है। इसे संतुलित और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सबसे अहम बदलाव दिव्यांग आरक्षण को लेकर किया गया है। नए नियमों के अनुसार कुल 4 प्रतिशत पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित होंगे। इसमें दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, शारीरिक रूप से असमर्थ, कुष्ठ रोग मुक्त, तेजाब पीड़ित, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, ऑटिज्म और बहुदिव्यांगता श्रेणी को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अगर किसी वर्ष योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो सीटें अगले वर्ष कैरी फॉरवर्ड होंगी।

पदोन्नति के लिए मूल्यांकन प्रणाली को भी ज्यादा सख्त और पारदर्शी बनाया गया है। कुल 100 अंकों के मूल्यांकन में फैसलों की गुणवत्ता, ACR, मामलों के निपटारे की दर, विजिलेंस रिपोर्ट, कानून का ज्ञान, व्यवहारिक कौशल और इंटरव्यू शामिल होंगे।

न्यूनतम क्वालीफाइंग मार्क्स भी तय कर दिए गए हैं। सामान्य वर्ग के लिए 60% और आरक्षित वर्ग (दिव्यांग सहित) के लिए 50% अंक अनिवार्य होंगे। योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर 1:3 के अनुपात में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

इन बदलावों के बाद अब छत्तीसगढ़ में न्यायिक सेवा की पदोन्नति प्रक्रिया नए नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगी।

 

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