Chhattisgarh | खिलखिलाती मुस्कान की नई इबारत लिख रहा बस्तर के वनांचल से नन्हा विक्रम

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Chhattisgarh | Little Vikram from the forest region of Bastar is writing a new chapter of cheerful smiles.

रायपुर। चिरायु योजना से उन परिवारों को निःशुल्क इलाज़ का लाभ पहुँचाना है, जो परिवार आयुष्मान भारत योजना में लाभ के लिए पात्र नहीं है। अंत्योदय परिवार और दिव्यांगजन चिरायु योजना के तहत निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकते है।

बस्तर जिले के सुदूर वनांचल में बसे तारागांव की गलियों में इन दिनों एक नई गूंज सुनाई दे रही है। यह गूंज है 6 वर्षीय बालक विक्रम कश्यप की खिलखिलाती मुस्कान और उसके साफ शब्दों की। एक मजदूर परिवार में जन्मे विक्रम के लिए जीवन की शुरुआत संघर्षों भरी रही। जन्मजात कटे- होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एंड पेलेट) की समस्या के कारण न केवल उसे भोजन करने में कठिनाई होती थी, बल्कि उसकी बोलचाल भी अस्पष्ट थी।

विक्रम कश्यप के लिए शारीरिक कष्ट से कहीं ज्यादा गहरा घाव गांव वालों की नजर और सहपाठियों के बीच होने वाली झिझक की हीन भावना से घिरा विक्रम अक्सर अपना मुंह छिपाए रखता था और अन्य बच्चों की तरह खुलकर हंसने का सिर्फ सपना ही देख पाता था।

विक्रम की बंद किस्मत का ताला तब खुला जब शासन का चिरायु दल आंगनवाड़ी जांच के लिए तारागांव पहुंचा। जांच के दौरान दल के सदस्यों ने न केवल विक्रम की स्थिति का सटीक निदान किया, बल्कि उसके पिता नरसिंग कश्यप को बेहतर उपचार का भरोसा भी दिलाया। शुरुआत में परिवार के मन में कई आशंकाएं थीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संवेदनशीलता और निरंतर संवाद ने उन्हें ऑपरेशन के लिए राजी कर लिया।

खंड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लोहण्डीगुड़ा जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जगदलपुर के कुशल मार्गदर्शन में विक्रम को बेहतर इलाज के लिए राजधानी रायपुर के मेडिशाइन अस्पताल ले जाया गया।

रायपुर के अस्पताल में विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों की टीम ने विक्रम का सफल ऑपरेशन किया, जिसने उसके फटे-होंठ और तालु को नया रूप दे दिया। कुछ ही हफ्तों के भीतर जब विक्रम वापस अपने गांव तारागांव लौटा, तो वहां का नजारा ही बदल गया था। वह शर्मीला बालक जो कभी अपना चेहरा ढककर चलता था, अब एक आत्मविश्वासी बच्चे के रूप में सबके सामने था।

सफल ऑपरेशन होने के बाद आज विक्रम न केवल स्पष्ट आवाज में अपने पिता से बात करता है, बल्कि घर के कामों में हाथ बंटाकर अपनी मां का सहारा भी बन रहा है। उसके पिता नरसिंग गर्व से कहते हैं कि शासन की चिरायु योजना उनके बेटे के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई।

विक्रम की यह सफलता की कहानी बस्तर के हृदय स्थल से निकलकर यह संदेश दे रही है कि प्रशासन की तत्परता और सही योजनाओं के क्रियान्वयन से कोई भी बच्चा उज्ज्वल भविष्य की आशा से दूर नहीं रह सकता। इस सुखद बदलाव के लिए विक्रम के माता-पिता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य विभाग के समस्त अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

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