Chhattisgarh Congress: The process of change in Congress has become a problem, block-division appointments are in limbo.
रायपुर। कांग्रेस ने संगठन में बड़े बदलाव के लिए ‘सृजन कार्यक्रम’ तो चला दिया, लेकिन नीचे से ऊपर तक बदलाव की यही प्रक्रिया अब पार्टी के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। हालात यह हैं कि नए जिला अध्यक्ष बना दिए गए हैं, लेकिन ब्लॉक और मंडल स्तर का पूरा ढांचा अब तक अधर में लटका हुआ है।
दरअसल, कांग्रेस ने सृजन कार्यक्रम के तहत 30 सितंबर 2025 तक प्रदेश में सभी नियुक्तियां पूरी करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन पर्यवेक्षकों की देरी, रिपोर्ट आने में विलंब और जिला अध्यक्षों के बदलाव में खिंचतान के चलते पूरा टाइमलाइन बिगड़ता चला गया।
सबसे बड़ा पेंच यहां फंसा कि जब तक जिला अध्यक्षों में बदलाव नहीं हुआ, तब तक पुराने जिला अध्यक्षों की निगरानी में ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों के लिए दावेदारों की सूची तैयार कर ली गई। स्वाभाविक तौर पर पुराने जिला अध्यक्षों ने अपनी पसंद के नामों को तरजीह दी और पैनल बनाकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिया।
दिलचस्प यह है कि मंडल और ब्लॉक स्तर की चयन प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद हाईकमान की अनुमति से दिसंबर में नए जिला अध्यक्षों की सूची जारी कर दी गई। अब स्थिति यह है कि PCC के पास पुरानी अनुशंसित सूची मौजूद है, जबकि नए जिला अध्यक्षों को यह तक नहीं पता कि उनके जिले में किन-किन नामों को भेजा जा चुका है।
यही वजह है कि नए जिला अध्यक्ष असमंजस में हैं। अभी तक PCC की ओर से उनसे ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों के चयन को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही इस मुद्दे पर नए जिला अध्यक्षों से चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पहली बार की जा रही है। शहरी इलाकों में चार-पांच वार्ड मिलाकर एक मंडल बनाया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे गांवों को मिलाकर मंडल गठन किया गया है। पार्टी के अंदरखाने माना जा रहा है कि शहरों में मंडल अध्यक्ष की भूमिका पार्षद से भी ज्यादा प्रभावशाली होगी।
नए जिला अध्यक्षों को मिलेगा प्रशिक्षण
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि नए जिला अध्यक्षों को जल्द ही रायपुर बुलाया जाएगा। यहां उन्हें संगठन, पार्टी कार्यक्रमों और आगामी रणनीति को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे नई जिम्मेदारियों के साथ मैदान में उतर सकें।
