Chhattisgarh | Cleaning on drying of paddy
रायपुर, 14 जनवरी 2026। धान खरीदी और भंडारण के दौरान सूखत और चूहों द्वारा नुकसान को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों के मुताबिक धान में सूखत कोई नई या असामान्य घटना नहीं, बल्कि नमी कम होने से होने वाली एक स्वाभाविक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में वर्षों से देखी जाती रही है।
सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी। यह आंकड़े साबित करते हैं कि सूखत अचानक पैदा हुई समस्या नहीं, बल्कि भंडारण के दौरान होने वाली तकनीकी वास्तविकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नमी, तापमान, भंडारण अवधि, परिवहन और वातावरण के असर से धान के वजन में प्राकृतिक कमी आती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “ड्रायिंग लॉस” कहा जाता है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत का अनुमान है, जो पिछले वर्षों के औसत के अनुरूप है।
सरकार का कहना है कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी है। डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता जांच, गोदाम ट्रैकिंग और परिवहन निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जिससे सूखत अब अनुमान नहीं बल्कि डेटा आधारित और ट्रैक करने योग्य प्रक्रिया बन गई है। जहां सूखत तय सीमा में रहती है, उसे सामान्य माना जाता है, और जहां असामान्य पाई जाती है, वहां जांच और जिम्मेदारी तय की जाती है।
अधिकारियों का दावा है कि डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान और शिकायत निवारण प्रणाली के चलते धान खरीदी व्यवस्था देश की सबसे निगरानी-आधारित प्रणालियों में शामिल हो चुकी है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है और सिस्टम में जवाबदेही मजबूत हुई है।
