Breaking | Supreme Court grants interim bail to former Excise Minister Kawasi Lakhma
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के करोड़ों रुपये के शराब घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत अस्थायी है और सभी याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई मुख्य मामलों के साथ की जाएगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दों की गहन जांच अंतिम सुनवाई के समय की जाएगी। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने मामले की जल्द सुनवाई का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि जांच अभी जारी है और इस कथित घोटाले में मंत्रियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि इस घोटाले के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। कोर्ट के रिकॉर्ड में रखे गए हलफनामे का हवाला देते हुए बताया गया कि कवासी लखमा को कथित तौर पर 64 करोड़ रुपये का कमीशन मिला। इसमें से लगभग 4.6 करोड़ रुपये पार्टी से जुड़ी गतिविधियों और करीब 10 करोड़ रुपये व्यक्तिगत संपत्तियों पर खर्च किए जाने का आरोप है, जिसमें उनके और उनके बेटे के मकान शामिल बताए गए हैं।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरोप और भी गंभीर हैं, जो मामले की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
वहीं, कवासी लखमा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि कई आरोपी पहले से जमानत पर हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1100 से अधिक गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और छह आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। ऐसे में लगातार हिरासत में रखे जाने का औचित्य नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए साफ किया कि मामले में कथित संलिप्तता उच्च स्तर की है और मुख्य याचिकाओं पर उचित समय पर पूरी सुनवाई की जाएगी।
