Chhattisgarh Cabinet Meeting | साल की आखिरी कैबिनेट मीटिंग कल ..

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Chhattisgarh Cabinet Meeting | Last cabinet meeting of the year tomorrow..

रायपुर। साल 2025 की आखिरी कैबिनेट बैठक बुधवार सुबह 11:30 बजे होने जा रही है। इस बैठक में रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव अहम एजेंडे के तौर पर रखा जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और अफसरों के स्तर पर इस पर राय-मशविरा भी हो चुका है।

शुरुआत में चर्चा थी कि 1 जनवरी से ही रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। अफसरों का कहना है कि तारीख से ज्यादा जरूरी है पूरी तैयारी के साथ सिस्टम को लागू करना।

मकर संक्रांति के बाद हो सकती है शुरुआत

सूत्रों के अनुसार, फिलहाल खड़मास का महीना चल रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसी वजह से संभावना जताई जा रही है कि 14 जनवरी, मकर संक्रांति के बाद रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम की औपचारिक शुरुआत हो सकती है।

संभागीय आयुक्त कार्यालय बनेगा कमिश्नर ऑफिस

पुलिस कमिश्नर के कार्यालय के लिए रायपुर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय का चयन किया गया है। नया भवन पूरी तरह तैयार है और संभागीय आयुक्त महादेव कांवड़े वहां शिफ्ट भी हो चुके हैं। मौजूदा एसपी कार्यालय को कंपोजिट बिल्डिंग के निर्माण के लिए तोड़ा जाना है, इसलिए पुलिस कमिश्नर कार्यालय उसी भवन में स्थापित किया जाएगा।

नाम का ही पुलिस कमिश्नर सिस्टम?

सूत्रों का कहना है कि भले ही 1 जनवरी या उसके बाद पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर दिया जाए, लेकिन शुरुआती चरण में यह सिर्फ नाम का सिस्टम होगा। पुलिस कमिश्नर को केवल प्रतिबंधात्मक धारा 151 के अधिकार दिए जाने की बात सामने आ रही है। जिला बदर, शस्त्र लाइसेंस, बार लाइसेंस जैसे अहम अधिकार देने के पक्ष में फिलहाल प्रशासन नहीं दिख रहा।

ओडिशा मॉडल पर असमंजस

देश में हाल ही में ओडिशा ने एक्ट बनाकर मजबूत पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया है। लेकिन छत्तीसगढ़ में एक वर्ग मध्यप्रदेश मॉडल से आगे बढ़ने के पक्ष में नहीं है। एमपी में आईएएस लॉबी के विरोध के चलते पुलिस कमिश्नर को सीमित अधिकार दिए गए थे, जिसे अब वहां भी प्रभावी नहीं माना जा रहा।

क्यों जरूरी है पुलिस कमिश्नर सिस्टम

वर्तमान व्यवस्था में पुलिस को हर छोटी-बड़ी कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ता है। लाठीचार्ज, धारा लागू करने, जुलूस-धरना अनुमति जैसे मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होती है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं, जिससे आपात हालात में तत्काल निर्णय संभव होता है।

छत्तीसगढ़ में सीमित अधिकारों वाला सिस्टम

हालांकि, सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में लागू होने वाला पुलिस कमिश्नर सिस्टम पूर्ण अधिकारों वाला नहीं होगा। पुलिस कमिश्नर को न तो शस्त्र लाइसेंस, न बार लाइसेंस और न ही जिला बदर जैसे अधिकार दिए जाएंगे। यानी सिस्टम होगा, लेकिन अधिकार सीमित रहेंगे।

 

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